आत्म समर्पण
आत्म समर्पण
बी. विश्वनाथाचारी
हे प्रभू ...तुम ही मेरे सब कुछ मेरे जीवन का सार ही तुम । त्रिभुवनों में अपने लिए तेरे बिना कोई नहीं है ।
हे परम प्रिय बन्धु मेरा वर्तमान और भविष्य मेरा स्वर्ग और मोक्ष मेरा सब कुछ सिर्फ तुम ही हो ।
हे करुणामय परम गुरु हे चिन्मय आनंद सागर तुम ही मेरा मार्ग तुम ही मेरा लक्ष्य
हे परम पूज्य प्रभु तुम ही प्रेम मय जगदंबा अपराध करने से सजा देनेवाले पिता ही भी तुम ही हो ।
सृष्टि - स्थिति - लय कार्य निर्वाह करनेवाला तुम ही हो । तुम ही मेरी जीवन नाव का मालिक । मेरा सर्वस्व तेरा ही है ।
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